अहंकार
अहंकार एक सागर है ,
जहाँ, अहं की लहरे
लेती है अक्सर हिलोरे.
ये लहरे लील लेती है,
उन मछुवारो को ,
जो है प्रेम का प्रतीक
अक्सर उठते है इनसे
ज्वर भाटा के बवंडर.
कभी सुनामी सा कहर.
प्रेम,त्याग,स्नेह की
गंगा,जमुना,सरस्वती
खो देती है अपना अस्तित्व,
इस अहं सागर में ,
होते ही विलीन.
तब रह जाता है वहां केवल,
और केवल अहंकार का सागर
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