Saturday, 18 May 2013

अहंकार


अहंकार

अहंकार एक सागर है ,
जहाँ, अहं की लहरे
लेती है अक्सर हिलोरे.

ये लहरे लील लेती है,
उन मछुवारो को ,
जो है प्रेम का प्रतीक

अक्सर उठते है इनसे
ज्वर भाटा के बवंडर.
कभी सुनामी सा कहर.

प्रेम,त्याग,स्नेह की
गंगा,जमुना,सरस्वती
खो देती है अपना अस्तित्व,
इस अहं सागर में ,
होते ही विलीन.

तब रह जाता है वहां केवल,
और केवल अहंकार का सागर

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