जिन्दगी दिखाई देती है ,जब कोई दुनिया में आता है,
लेकिन आँखे मूद लेते है, जब कोई दुनिया से जाता है.
गौर से ख्याल करना ,नाचती है मौत शमशान में,
लेकिन हम तो खोये रहते है ,अपनी आन -बान में.
कठपुतली बन जाते है मौत के हाथो,पैदा होते ही हम
डोरी खींचले कब पता नहीं , मौत को आता नहीं किसी पे रहम
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बड़ा
हम में से हर कोई ,बनना चाहता है बड़ा!
बड़ा होना क्या होता है ये शायद हमें नहीं पता.
कोई पद का पा लेना या अकूत धन पा लेना ?
विशाल काय शरीर पा लेना या सुंदर तन पा लेना?
क्या वह बड़ा है ,जिसका दिमाग चलता है हर वक़्त
या वह बड़ा है ,जिसके है हजारो हजार भक्त,
यह बड़ा कहाँ होता है ,है किसी को पता
ये कैसे हासिल होता है,है किसी को पता
लोग कहते है,भगवान् है बड़ा
तो इस बड़े के लिए , इनसान क्यूँ लड़ा
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