Saturday, 18 May 2013

मौत एक दिन आएगी ये तो तय है, तो जिन्दगी जीने में क्यों भय है.

मौत एक दिन आएगी ये तो तय है,
तो जिन्दगी जीने में क्यों भय है.

आओ संवारे ये जीवन के अनमोल पल
आज जिलो भरपूर, किसने देखा कल .
जियो और जीने दो ,यही इसका आशय है
मौत एक दिन आएगी ये तो तय है,
तो जिन्दगी जीने में क्यों भय है.

कपड़ें से सेहरा बने ,कपड़ें से कफन,
इनसे कोई न बचा ,लाख करो जतन.
मौत एक दिन आएगी ये तो तय है,
तो जिन्दगी जीने में क्यों भय है.

यही रह जायेंगे नफरत, दर्प ,अभिमान,
देर न करो ,बन जाओ बस इनसान.
जो दुनिया को कुछ दे गया , होती उसकी जय है
मौत एक दिन आएगी ये तो तय है,
तो जिन्दगी जीने में क्यों भय है.

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