मैं हार की उस पराकाष्टा तक गुजर जाना चाहता हू,
जहाँ से हार भी हार मान ले!
दर्द , तब दर्द नहीं रह जाता
जब उसे हम प्यार मान ले!
जहर ने डुबाया हमें आकंठ
फिर भी हुम न हुए नीलकंठ
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जहाँ चहकती थी ,गोरैया ,मैना
गाडियों का शोर है ,वहां दिन रैना
किसे भायेगा ऐसा शहर
जहाँ मुश्किल हो गुजर बसर
आएगा ऐसी जगह कहाँ से चैना
जहाँ चहकती थी ,गोरैया ,मैना
गाडियों का शोर है ,वहां दिन रैना
बड़ी-बड़ी अट्टालिकाएं,बनाई भोग के लिए
अस्पतालों का अम्बार लगाया रोग के लिए
इससे बढ़िया लाख ,गाँव का चना चबेना
जहाँ चहकती थी ,गोरैया ,मैना
गाडियों का शोर है ,वहां दिन रैना
लूटपाट ,पाप ने मचाया कहरसं
वेदना शून्य हो गया शहर
यहाँ किसी को किसी से प्यार है ना
जहाँ चहकती थी ,गोरैया ,मैना
गाडियों का शोर है ,वहां दिन रैना
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भीड़ में जाता हू,जब भी, मन होता है अकेला.
खोने का डर सताता है,जब होता है मेला
पसंद नहीं मुझे ,बयार में बहना
अखरता है ,मुझे ज्यादा देर बाजार में रहना
मुझे गुरु न बनाओ,मैं अच्छा नादान चेला.
भीड़ में जाता हू,जब भी, मन होता है अकेला.
खोने का डर सताता है,जब होता है मेला
वाचालता बन जाती है कभी उल्टा तुरुप,
इससे तो लाख बढ़िया ,है रहना चुप.
चुप आदमी करता नहीं कहीं झमेला
भीड़ में जाता हू,जब भी, मन होता है अकेला.
खोने का डर सताता है,जब होता है मेला
ज्ञान का तमगा किसी की जागीर नहीं.
अति मीठी या न मीठी, ठीक खीर नहीं
बुराई दूर करो खुद से,रोज बनो नया नवेला
भीड़ में जाता हू,जब भी, मन होता है अकेला.
खोने का डर सताता है,जब होता है मेला