Saturday, 24 December 2016

कवि ने तो कर दिया
धरा का आसमान से मिलन,
विज्ञान ने उसे नकार कर
कवि का दुखी कर दिया मन

हे कवि रचो कुछ और,
जहाँ न हो विज्ञान की ठौर

अब सब कल्पना से परे है
कवि पड़ो विज्ञान
अब वन विहीन जंगल में मंगल
लगेगा अज्ञान

हे कवि रचो कुछ और,
जहाँ न हो विज्ञान की ठौर

वैसे ही हो चुकी है दुनिया  बहुत जहरीली
अब जहर से डूबी स्याही की कलम चमकीली
उसे प्रलय को न धकेल दे

हे कवि रचो कुछ और,
जहाँ न हो विज्ञान की ठौर

लिखो फिर से शिशु की लोरिया
सृजन के गीत
रचो मिल बैठ फिर से ,
सुनहरा अतीत

Wednesday, 7 September 2016

भरी जवानी पैसे जोड़े ,
न कुछ  खाया
पैसे अपनाएं  ,
किया बांकी सब कुछ पराया

बँगला बनाया
गाडी आयी
नौकर आये ,
ख़ुशी-- ख़ुशी  ?

तन संवारा
घर संवारा
ऐश तो था,
पर मन -मन ?

अब है सब
पर खाना मना
चलना मना
दवा, डॉक्टर

क्या इसी दिन की चाहत में ,
जोड़ा था पैसा

Thursday, 23 May 2013


वह किसी से मिलता नहीं, जुदाई के दर से,
नहीं तो उसका क्या वास्ता,तन्हाई के घर से.

वह बिखरा है अनेको बार ,टूट के इतना.
दोस्ती तोड़ दी सबसे इसी डर से.

कभी किसी के दिल का नूर था,वह,
आज बचता –फिरता है ,उसी के नजर से

जख्म दे गए गहरा ,कुछ चेहरे इतना,
की उभर आते है ,वो दीवारों-पत्थर से.



Saturday, 18 May 2013

चिराग आएगा ही याद, जब- जब भी अँधेरा होगा, हारा वो गुमनाम,जीते हुए से सब कहेंगे ,ये कोई अपना मेरा होगा

चिराग आएगा ही याद, जब- जब भी अँधेरा होगा,
हारा वो गुमनाम,जीते हुए से सब कहेंगे ,ये कोई अपना मेरा होगा

अपेक्षाओ का बोझ ढोते बच्चे


अपेक्षाओ का बोझ ढोते बच्चे
किताबो के पुलंदे तले दबे बच्चे
तर्क-वितर्क में उलझे बच्चे
अविकसित दिमाग से जूझते बच्चे
अबोधवय में अर्जित ज्ञान
ये तो नहीं कुशाग्रता की पहचान
क्या ये बन तो नहीं रहे  रोबोट
स्वकेन्द्रित होते बच्चे.
संस्कारो से इनका वियोग तो नहीं,
क्या ये आधुनिकता नाम का रोग तो नहीं?


          

अहंकार


अहंकार

अहंकार एक सागर है ,
जहाँ, अहं की लहरे
लेती है अक्सर हिलोरे.

ये लहरे लील लेती है,
उन मछुवारो को ,
जो है प्रेम का प्रतीक

अक्सर उठते है इनसे
ज्वर भाटा के बवंडर.
कभी सुनामी सा कहर.

प्रेम,त्याग,स्नेह की
गंगा,जमुना,सरस्वती
खो देती है अपना अस्तित्व,
इस अहं सागर में ,
होते ही विलीन.

तब रह जाता है वहां केवल,
और केवल अहंकार का सागर

कोई दर्द बुरा नहीं होता . बिना दर्द के कोई नहीं रोता

कोई दर्द बुरा नहीं होता .
बिना दर्द के कोई नहीं रोता .

दर्द प्रक्रिया है जनन की,
दर्द कवायद है ,मनन की।
वो क्या तैरेंगे ,जो लगाइएँगे नहीं गोता
कोई दर्द बुरा नहीं होता .
बिना दर्द के कोई नहीं रोता .
कमलेश ,जो दर्द न होता तो तलाश न होती सुकून की
खून न  बहा हो जिसका ,वह कीमत क्या समझे खून की
दर्द देने वाला ,सुकून के बीज नहीं  बोता

दर्द ने बनाये अनगिन कवि ,शायर
जो बचा दर्द से ,वो बना कायर
बनो इंसान ,बनो नहीं तोता
कोई दर्द बुरा नहीं होता .
बिना दर्द के कोई नहीं रोता .