तथाकथित समाज सेवक हमारे बीच में है जो प्रिंट मिडिया या इलेक्ट्रॉनिक मिडिया के साथ आकर, समाज सेवा की महज रस्म अदायगी करते है, मिडिया न्यूज़ बनाने के, छापने का अच्छा पैसा इनसे वसूल करता है. इस तरह से समाज सेवक पैदा हो जाते है फिर यह मिडिया संस्थानों के आय स्रोत्र बन जाते है और मिडिया की बदौलत इन पर मालाएं चड़ती रहती है। जितना पैसा यह तथाकथित समाज सेवक मिडिया को देते है, उतने में 20-25 गरीबों का घर आसानी से चल सकता है।
कुछ लोग ऐसे भी है जो खुद से की गई सेवा से भी आत्म मुग्ध रहते है,इनमे अधिकतर वे लोग शुमार है जो "इसकी टोपी, उसके सर "का धंधा करते है।
जिन औद्योगिक घरानों को लोग गालियां देते है, वे चुपचाप आपदा काल में करोड़ो की मदद कर देते है, इसकी किसी को खबर नहीं लगती है.
बिड़ला ग्रुप की "Century Pulp & Paper ने प्रदेश की सभी सरकारी डेयरी को, पल्स ऑक्सीमीटर, सैनिटाइजर, मास्क, गलब्ज आदि की kit बनाकर दी
सुशीला तिवारी अस्पताल में कोविड बेड, ऑक्सीजन कंसंन्ट्रेटर मिला कर करोड़ का समान एक बार, फिर गलब्ज, मास्क का वितरण कई बार किया, हनिवेल ग्रुप ने
ऑक्सीजन कंसंन्ट्रेटर आदि दिये
महेंद्रा ग्रुप ने कल ही देहरादून में 100ऑक्सीजन कंसंन्ट्रेटर, एम्बुलेंस,1000liter per minute का ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट दिया. इसके अलावा बहुत से छोटे बड़े औद्योगिक घराने है जिनकी सेवाएं, अतुलनीय है.
और यह सब बिना प्रचार के चल रहा है।
लोग कहते है इनको टेक्स में, अन्य सरकारी खर्चों में छूट मिल जाएगी, लेकिन सोशल वेलफेयर में जो योगदान इनसे देश को मिल रहा है वह निश्चित ही काबिले गौर है 🙏🏻
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