Friday, 9 October 2020

Weakness & Strength

I was observing , a lizard and aunts. 
Lizard used to kill aunts daily. 
On Day Lizard fell from the wall and unfortunately come underneath of my foot. However I have lifted my foot scarcely, but Lizard wounded. Aunts felt the smell of feast and eaten up whole Lizard within 6-7 hours. 
It means, Circumstances changes the game so better be patient and courageous. 

Sunday, 30 August 2020

कोरोना काल

कल रात पता लगा, हमारे एक पड़ोसी, उम्र यही कोई  40-45 रही होगी, नहीं रहे. एक सप्ताह पहले, मैंने उनको, अपनी पत्नी के साथ सुबह सैर पर जाते देखा और अब अकस्मात उनके निधन😂 की खबर ने भीतर तक हिला दिया. 

कुछ कमर झुका के चलते थे, सुना है करीब चार दिन पहले, सुबह की सैर पर जाते समय, कुत्तों की वजह से वह गिर गये थे, फिर एक न्यूरोसर्जन के वहाँ भर्ती रहे, वहाँ कुछ इलाज चलता रहा है, एकाएक न्यूरो सर्जन ने, कोविड सेंटर भेज दिया, जहाँ उनका देहांत हो गया. 2लड़कियो, एक लड़का, पत्नी, बुजुर्ग बीमार पिता उन पर आश्रित थे. 

नियति देखिये, आदमी बड़ी बड़ी कल्पनायें करता है और अनिश्चित मौत सब बिखेर देती है. 

मन मेरा भी उद्विग्न है, पूरे शरीर मे यह खबर सुनकर सिहरन है. एक सबके साथ यही होता है. 



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Last night it was found out that one of our neighbors, the age must have been 40-45, no more.  A week ago, I saw him going on a morning walk with his wife and now the news of his death suddenly shook him from within.


 Some were bending their waist, heard that about four days ago, while going on a morning walk, he fell due to dogs, then admitted to a neurosurgeon, there has been some treatment, a sudden neuro surgeon,  Sent to Kovid Center, where he died.  2 girls, a boy, wife, elderly sick father were dependent on him.


 Look at the destiny, man makes big fantasies and uncertain death disintegrates everyone.


 My mind is also excited, hearing this news in whole body is shuddering.  This is what happens to everyone.



Thursday, 9 August 2018

Facebook-Facebook

लोगो की देखादेखी फेसबुक में अकाउंट खोला
पहला फ्रेंड रिक्वेस्ट महिला का देख दिल डोला
गायब हुई  रात की नींद व  दिन का चैन
दिल धड़क रहा था ,तड़प रहे थे नैन
रिक्वेस्ट फिर मैंने कर ली  स्वीकार
इस उहापोह में , पड़ गया बीमार
हाई, nice click से कर शुरुवात
बाद में like में जाके रुक गई बात
शायद हम दोनों ही थे facebook में नये
इसलिए  like  में जाके रुक गये

फिर धीरे धीरे बढ़ने लगे  Friend
सिखने लगा मैं भी facebook का trend
फिर पोस्ट करने लगा विचार
शुरू में like मिलते थे तीन चार
फिर शेयर किए, वीडियो  किस्से चुटीले
कुछ की पोस्ट में कमेंट किये नुकीले
बढ़ गये जरूर मेंरे लाइक
लेकिन मैं हो गया नालायक





Sunday, 26 February 2017

हाँ मैं पहाड़ी हू,

इस सुन्दर धरती का,
एक प्यारा सा देश
मेरे देश का ललाट ,
है मेरा पहाड़

इस पहाड़ पर चढ़ उतर,
लोग करते है ,अपनी  गुजर
आपाधापी की दौड़ से विरत
करते ,खुशियों का कीरत

पहाड़ है हमारी प्रेरणा ,
मौसम ,हवा ,बर्फ में ,
शांत अविचल रहने वाले ,
मेरे पहाड़

हम दूर नहीं जा पाएंगे
इनसे ज्यादा .
मुझे पता है अपने आगोश
में ,लेने को हमे ये बेकरार
करते है हमारा इन्तजार

मैं हू पहाड़ी ,हाँ पहाड़ी
यही पहचान है मेरी 

Monday, 13 February 2017

    पल
 हर दिन, यहाँ तक की आने वाला  पल भी ,
  कोई नहीं जानता नहीँ,कि वह आयेगा की नहीं !
  फिर भी यह डाह क्यों ,यह नफरत क्यों ?
  आत्मवंचना क्यों, हीनता क्यों ?
  परिचय क्यों , विषय क्यों
  दूसरे की रोटी को छीनकर  अपना,
   उदर भरने की चाहत क्यों ?
  हर पल जियो इस अहसास में,
  बस यही पल है तुम्हारा
 ,

Saturday, 24 December 2016

कवि ने तो कर दिया
धरा का आसमान से मिलन,
विज्ञान ने उसे नकार कर
कवि का दुखी कर दिया मन

हे कवि रचो कुछ और,
जहाँ न हो विज्ञान की ठौर

अब सब कल्पना से परे है
कवि पड़ो विज्ञान
अब वन विहीन जंगल में मंगल
लगेगा अज्ञान

हे कवि रचो कुछ और,
जहाँ न हो विज्ञान की ठौर

वैसे ही हो चुकी है दुनिया  बहुत जहरीली
अब जहर से डूबी स्याही की कलम चमकीली
उसे प्रलय को न धकेल दे

हे कवि रचो कुछ और,
जहाँ न हो विज्ञान की ठौर

लिखो फिर से शिशु की लोरिया
सृजन के गीत
रचो मिल बैठ फिर से ,
सुनहरा अतीत

Wednesday, 7 September 2016

भरी जवानी पैसे जोड़े ,
न कुछ  खाया
पैसे अपनाएं  ,
किया बांकी सब कुछ पराया

बँगला बनाया
गाडी आयी
नौकर आये ,
ख़ुशी-- ख़ुशी  ?

तन संवारा
घर संवारा
ऐश तो था,
पर मन -मन ?

अब है सब
पर खाना मना
चलना मना
दवा, डॉक्टर

क्या इसी दिन की चाहत में ,
जोड़ा था पैसा