पल
हर दिन, यहाँ तक की आने वाला पल भी ,
कोई नहीं जानता नहीँ,कि वह आयेगा की नहीं !
फिर भी यह डाह क्यों ,यह नफरत क्यों ?
आत्मवंचना क्यों, हीनता क्यों ?
परिचय क्यों , विषय क्यों
दूसरे की रोटी को छीनकर अपना,
उदर भरने की चाहत क्यों ?
हर पल जियो इस अहसास में,
बस यही पल है तुम्हारा
,
हर दिन, यहाँ तक की आने वाला पल भी ,
कोई नहीं जानता नहीँ,कि वह आयेगा की नहीं !
फिर भी यह डाह क्यों ,यह नफरत क्यों ?
आत्मवंचना क्यों, हीनता क्यों ?
परिचय क्यों , विषय क्यों
दूसरे की रोटी को छीनकर अपना,
उदर भरने की चाहत क्यों ?
हर पल जियो इस अहसास में,
बस यही पल है तुम्हारा
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