Monday, 27 June 2022

तन्हाई

तन्हाई का भी अपना मजा है
कभी इसमें भी वक्त की रजा है।

हमसफ़र गर हमख्याल न हो तो,
वह भी जिंदगी की बड़ी सजा है
तन्हाई का भी अपना मजा है

रूह भी साथ छोड़ देती है दोस्तों
जब आती किसी को कजा है।
तन्हाई का भी अपना मजा है






Sunday, 12 June 2022

दावानल -कविता


वृक्ष जल उठे
जड़ी बूटी हुई खाक।
चारा चरते मवेशी मरे
भस्म हुआ उनका शाक।।
ग्रीष्म ऋतु  हैं
फैला भीषण दावानल।
वनचर  प्यासे हुए 
कब आएंगे जाने बादल।।
धुएँ से प्रदूषण हुआ
धू धू कर जल उठे जंगल।
इंसानों की गलतियों से 
हुआ 'जंगल में अमंगल'।।
 वन्यजीव हुए काल कवलित 
वन जीवन हो गया त्रस्त
मानव ना जागेगा अब भी तू तो 
धरती का सूर्य हो जायेगा अस्त।।