Tuesday, 3 August 2021

ओलम्पिक खेल

ओलम्पिक खेलों का, खिलाड़ियों के जीवन मे बहुत बड़ा महत्व है, पर्वतारोहियों के लिए, एवरेस्ट फतह कर लेना और खिलाड़ियों का ओलम्पिक पदक, दोनों बराबर है, उस पर भी स्वर्ण, इससे बड़ी ख़ुशी  खिलाड़ियों के लिए कुछ हो नहीं सकती।
प्राचीन ओलम्पिक की शुरुआत 776 B.C में हुई मानी जाती है।
ओलंपिया पर्वत पर खेले जाने के कारण इसका नाम ओलम्पिक पड़ा। ओलम्पिक में राज्यों और शहरों के खिलाड़ी भाग लेते थे। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ओलम्पिक खेलों के दौरान शहरों और राज्यों के बीच लड़ाई तक स्थगित कर दिए जाते थे। इस खेलों में लड़ाई और घुड़सवारी काफी लोकप्रिय खेल थे।
कहा जाता है कि हरक्यूलिस ने ज्यूस के सम्मान में ओलम्पिक स्टेडियम बनवाया गया। छठवीं और पांचवीं शताब्दी में ओलम्पिक खेलों की लोकप्रियता चरम पर पहुंच गई थी। लेकिन बाद में रोमन साम्राज्य की बढ़ती शक्ति से यूनान खास प्रभावित हुआ और धीरे-धीरे ओलम्पिक खेलों का महत्व गिरने लगा।

आधुनिक ओलम्पिक 1896 मे शुरू हुए,ओलम्पिक खेलों मे मशाल- जलाने की शुरुआत 1928 से एम्स्टर्डम ओलम्पिक से हुई 

ओलम्पिक के इतिहास में, भारत ने पहली बार 1928 में स्वर्ण पदक मिलाकर कुल तीन पदक भी जीते ।
1900 में, एकमात्र खिलाड़ी नार्मन प्रिजार्ड (एंग्लो इंडियन) के साथ भाग लिया, जिसने एथलेटिक्स में दो रजत पदक जीते। 1920 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में देश ने पहली बार एक टीम भेजी और उसके बाद से हर ग्रीष्मकालीन खेलों में भाग लिया.

जब तक हम ग्रामीण स्तर तक, खेलों को लोकप्रिय नहीं बनाएंगे, वहाँ खेलों के मैदान, विश्व के लोकप्रिय खिलाड़ियों की प्रोत्साहित करने वाली कहानियां नहीं सुनाएंगे हम ओलम्पिक मे शक्ति नहीं बन सकते.
भारत के कई प्रदेशों मे लोग जिस दुरूहता से जीवन मे संघर्ष कर रहे है, उसे देखकर तो लगता है कि अगर उनकी ऊर्जा को खेलों मे रूपांतरित कर दिया जाय तो मजा आ जाय।
खेलों को, राजनिती से जितना दूर रखा जाये, उतना ही श्रेयसकर रहेगा 

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