Wednesday, 20 September 2023

खुद से मुलाक़ात

कभी खुद से भी
कर लिया करो बात
कितना वक्त गुजर गया
खुद से भी जो नहीं हुई मुलाक़ात

क्या ही अच्छा होता
जो चिंता मे होता महज रोटी भात
धन, बैंक की तिजोरी की चिंता
कर दिया, जिनके लिए एक दिन रात

कभी खुद से भी
कर लिया करो बात
कितना वक्त गुजर गया
खुद से भी जो नहीं हुई मुलाक़ात


न सियासत, न नफासत
न ऊंच नीच, न जात पात
मन कहले, मस्तिष्क कहले
सुन अपने भीतर की धात

कभी खुद से भी
कर लिया करो बात
कितना वक्त गुजर गया
खुद से भी जो नहीं हुई मुलाक़ात

खुद से दूर होकर,
मिट जायेंगे जज्बात
खुद को सुनना सीख
भूल जा जीवन की शह मात

कभी खुद से भी
कर लिया करो बात
कितना वक्त गुजर गया
खुद से भी जो नहीं हुई मुलाक़ात





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