Sunday, 26 February 2017

हाँ मैं पहाड़ी हू,

इस सुन्दर धरती का,
एक प्यारा सा देश
मेरे देश का ललाट ,
है मेरा पहाड़

इस पहाड़ पर चढ़ उतर,
लोग करते है ,अपनी  गुजर
आपाधापी की दौड़ से विरत
करते ,खुशियों का कीरत

पहाड़ है हमारी प्रेरणा ,
मौसम ,हवा ,बर्फ में ,
शांत अविचल रहने वाले ,
मेरे पहाड़

हम दूर नहीं जा पाएंगे
इनसे ज्यादा .
मुझे पता है अपने आगोश
में ,लेने को हमे ये बेकरार
करते है हमारा इन्तजार

मैं हू पहाड़ी ,हाँ पहाड़ी
यही पहचान है मेरी 

Monday, 13 February 2017

    पल
 हर दिन, यहाँ तक की आने वाला  पल भी ,
  कोई नहीं जानता नहीँ,कि वह आयेगा की नहीं !
  फिर भी यह डाह क्यों ,यह नफरत क्यों ?
  आत्मवंचना क्यों, हीनता क्यों ?
  परिचय क्यों , विषय क्यों
  दूसरे की रोटी को छीनकर  अपना,
   उदर भरने की चाहत क्यों ?
  हर पल जियो इस अहसास में,
  बस यही पल है तुम्हारा
 ,