Friday, 30 December 2022

हंसने वालों से डर गया हूँ मै

कमलेश,हंसने वालों से डर गया हूँ मै
जिंदा हूँ तन से, मन से मर गया हूँ मै।

दुनियां यूँ ही नहीं भुला पायेगी मुझे,
थोड़ा ही सही,कुछ तो  कर गया हूँ मै।

मुझे मिटाने मे, जख्मी हो गये थे जो,
मरहम से उनके ज़ख्म भर गया हूँ मै।

अल्फाजों के जहाँ मे, पनाह ली है जबसे
माया मोह के बंधनों से, तर गया हूँ मै
कमलेश,हंसने वालों से डर गया हूँ मै
जिंदा हूँ तन से, मन से मर गया हूँ मै।