कवि ने तो कर दिया
धरा का आसमान से मिलन,
विज्ञान ने उसे नकार कर
कवि का दुखी कर दिया मन
हे कवि रचो कुछ और,
जहाँ न हो विज्ञान की ठौर
अब सब कल्पना से परे है
कवि पड़ो विज्ञान
अब वन विहीन जंगल में मंगल
लगेगा अज्ञान
हे कवि रचो कुछ और,
जहाँ न हो विज्ञान की ठौर
वैसे ही हो चुकी है दुनिया बहुत जहरीली
अब जहर से डूबी स्याही की कलम चमकीली
उसे प्रलय को न धकेल दे
हे कवि रचो कुछ और,
जहाँ न हो विज्ञान की ठौर
लिखो फिर से शिशु की लोरिया
सृजन के गीत
रचो मिल बैठ फिर से ,
सुनहरा अतीत
धरा का आसमान से मिलन,
विज्ञान ने उसे नकार कर
कवि का दुखी कर दिया मन
हे कवि रचो कुछ और,
जहाँ न हो विज्ञान की ठौर
अब सब कल्पना से परे है
कवि पड़ो विज्ञान
अब वन विहीन जंगल में मंगल
लगेगा अज्ञान
हे कवि रचो कुछ और,
जहाँ न हो विज्ञान की ठौर
वैसे ही हो चुकी है दुनिया बहुत जहरीली
अब जहर से डूबी स्याही की कलम चमकीली
उसे प्रलय को न धकेल दे
हे कवि रचो कुछ और,
जहाँ न हो विज्ञान की ठौर
लिखो फिर से शिशु की लोरिया
सृजन के गीत
रचो मिल बैठ फिर से ,
सुनहरा अतीत